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Friday, September 30, 2016

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जागरूता का समर्थन


-प्रेमबाबू शर्मा

कंगना रानौत स्वच्छ अभियान एक लघु फिल्म का निर्माण करने वाले डा. अनिल मुरारका और मनीष मुरारका ने अपनी अगामी पहल के तहत् प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की मोहिम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का समर्थन करते हुए अशक्त परिवार की बेटियो की शिक्षा पूर्ति के लिए एक लाख सत्तासी हजार से अधिक रकम का दान किया हैं. 

इसके अलावा आर्मी इमरजेंसी रिलीफ कोष लड़ाई हताहतों के लिए एक लाख से अधिक रकम दान करते हुए अब आम जन से अपील कि हैं कि वह भी हमारे देश की आर्मी के लिए अपने सक्षम अनुसार दान करें।
इस मौके सैकडों कन्याओं के अलावा संदीप सोपारकर और श्वेता खंडूरी उपस्थित थे।

Gurgaon based School Girl starts after school initiative ANMOL SIKSHA for rural children


Seventeen year old girl Sehar Bajwa , class XII of Shri Ram School, Moulsari , Gurgaon (Gurugram) has launched an after school initiative titled ‘Ánmol Siksha’ to empower rural school children between the ages of 14-17 by providing essential entrepreneurship skills .

Sehar Bajwa, who is currently pursuing her International Baccalaureate Diploma in class 12 from the Shri Ram School, Moulsari, Gurgaon , got inspired to empower the children, while writing a research paper on school drop-out rates in Punjab last year. “I was alarmed at the statistics released by UNESCO Institute for Statistics and Global Education Monitoring Report that 47 million adolescents in India have not progressed to upper secondary school, and remain unemployable” said Ms Sehar Bajwa, the founder of initiative Ánmol Siksha’

“ A pilot project of Anmol Shiksha has been started by setting up Centre for Learning in Derabassi in Punjab near Chandigarh last year, and currently is working with 60 children through voluntary teachers . We have devised special curriculum that improves their IQ and EQ levels overing subjects like moral values, leadership, entrepreneurship and hands-on experience in Science, Technology, Engineering and Mathematics (STEM) .” said Ms Bajwa.

“ I wishes to take Anmol Shiksha to a scalable level, which will help enrich the lives of students residing in rural areas and allow them to become better-informed citizens who can constructively contribute to India’s growth. The advent of www.anmolshiksha.com will ultimately help serve the aggressive Make in India campaign and thereby raise the standards of living of Indian citizens.” Said beaming Ms Bajwa.

“It is the my ultimate vision to equip each child with skills that will help transform children from job seekers to job creators.After success of Anmol Siksha Derrabassiproject, I plan to set up similar projects in states of Haryana , Punjab and Uttarakhand ” She added.

Sehar did her earlier schooling at Welham Girls' School in Dehradun and undertook couple of undergraduate courses from Harvard University Boston, where she had the opportunity to work with the underprivileged .

NAVARATHRI CELEBRATIONS at Sri Ram Mandir Dwarka


NAVARATHRI CELEBRATIONS (Saturday 01st OCTOBER 2016 To Tuesday 11th OCTOBER 2016) CHANDI HOMAM on Tuesday 11th OCTOBER 2016 With the blessings of Goddess Kameshwari, Sri Ram Mandir, Sector 7, Dwarka, New Delhi, will be conducting Navarathri Celebrations from Saturday 01st October 2016 to Wednesday 11th October 2016, as per the following programme: Daily Programme from 01st October 2016 to 10th October 2016 Daily at 9.00 AM Lalitha Sahasranama Archanai to Devi Kamehswari




Devotees interested in participating in the above sewa, are requested to give details like Gotharam, Nakashatram, Rasi and Name along with the above amount to the Manager during temple timings. Devotees can remit online to The Delhi Bhajana Samaj Sri Ram Mandir Trust Savings Account No : 2948101052633, Canara Bank, CCRT Dwarka, IFSC Code : CNRB0002948, after remitting please send email. Devotees are requested to attend in large numbers and be recipient of the blessings of Goddess Kameshwari on the above occasion.

Temple Management Committee
9312247576, 9968093927, 9810138189, 9868231042, 9810874834
E-mail: mandir.dwarka@gmail.com Web : www.srirammandirdwarka.org

Thursday, September 29, 2016

सुन्दरकाण्ड- सभी सुन्दर हैं !!!

मधुरिता

इसकी शुरुआत वर्णनामार्थ संसाधना से किया है। वर्ण कहते हैं अक्षर अर्थात जो नित्य है वही सत्य है। अंत में उत्तर कांड में "मानव "शब्द आया है। … जो हम सन्सार रूपी सूर्य की प्रचण्ड किरणों से दुखी मानवों विज्ञान भक्ति प्रदम तथा शिव कर्म रूपी फल प्राप्त कर लेते हैं, अतः यह रामचरितमानस रूपी वृक्ष का कल्याणकारी फल होकर सुन्दरकाण्ड तने की [साधनाकांड] है।

स्वामी तुलसीदास जी ने आठ सोपान में रामचरितमानस को लिखा है -बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड , उत्तररामायणकांड एवं लवकुश कांड हैं।

इसमें जो पंचम सोपान सुन्दरकांड तुलसीदास जी की रचित ऐसी अमूल्य निधि है जिसका वर्णन वाणी से करना संभव नही है। केवल भावपूर्ण भक्ति से सुनना , पढ़ना और इसका मनन करने से ही इस सुंदरता रूपी रास का आनंद ले सकते हैं.

भावमयी दृष्टि से देखने पर तो ये सातों सुरों से अलंकृत हैं , जो संगीतमय होकर नवधा भक्ति से ओत -प्रोत हैं. जितने भी भी उपमा एवं उपमये हैं इन सब से पर सुन्दरकाण्ड का जीवन में पदार्पण होता है.

जहां आनंद का समावेश व भक्ति रूपी गंगा का गुणगान हो वहां स्वतः सौंदर्य उत्कृष्ट पराकाष्ठा को पार कर जाते हैं, फिर हमें उनका वर्णन करना तो दुर्लभ ही जान पड़ता है, यह वैसे ही है जैसे जिसने उसे चखा है वही आनंद का अधिकारी बन सकता है।

ज्ञानियों में अग्रगण्य सम्पूर्ण गुणों के निधन वानरों के स्वामी श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र अंजनी के लाल श्री हनुमान जी महाराज को कोटि कोटि नमन। अंजनी माँ हनुमान जी को सुन्दर भी कहती थी इसमें उनका वर्णन होने के कारन इसका नाम सुन्दरकाण्ड पड़ा।

इसकी शुरुआत ही मन भावना से हुई है , सुन्दर शब्द की अमर-व्याख्या सुधा बहुत आदरणीय व चित्त को द्रवित करने वाली है। इस कांड में एक भी ऐसा प्रसंग नहीं है जो अंतमन में आदर न उत्पन्न करे. भक्ति से बह रहे रंगों में हनुमान जी ही नज़र आते हैं।

सबको मस्तक नवा कर तथा ह्रदय में श्रीरघुनाथ को धारण कर हनुमान जी हर्षित होकर सीता माता [ भक्ति] की खोज करने जाते हैं।

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥
बार-बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी॥


समुद्र के तीर पर एक सुंदर पर्वत था। हनुमान खेल से ही (अनायास ही) कूदकर उसके ऊपर जा चढ़े और बार-बार रघुवीर का स्मरण करके अत्यंत बलवान हनुमान उस पर से बड़े वेग से उछले।

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रम हारी॥

समुद्र ने उन्हें रघुनाथ का दूत समझकर मैनाक पर्वत से कहा कि हे मैनाक! तू इनकी थकावट दूर करनेवाला है (अर्थात अपने ऊपर इन्हें विश्राम दे)।

दो० - हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥ 1॥

हनुमान ने उसे हाथ से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा - भाई! राम का काम किए बिना मुझे विश्राम कहाँ?॥ 1॥

समुन्द्र किनारे पहुँचते है समुंद्री राक्षसी और लंका में प्रवेश करते है लंकनी मिलती है , सभी बाधाओं को ऋद्धि- सिद्धि का प्रयोग कर हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं।

छं० -
कनक कोटि बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना।
चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना॥
गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै।
बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै॥


विचित्र मणियों से जड़ा हुआ सोने का परकोटा है, उसके अंदर बहुत-से सुंदर-सुंदर घर हैं। चौराहे, बाजार, सुंदर मार्ग और गलियाँ हैं; सुंदर नगर बहुत प्रकार से सजा हुआ है। हाथी, घोड़े, खच्चरों के समूह तथा पैदल और रथों के समूहों को कौन गिन सकता है! अनेक रूपों के राक्षसों के दल हैं, उनकी अत्यंत बलवती सेना वर्णन करते नहीं बनती।

बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं।
नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं॥
कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं।
नाना अखारेन्ह भिरहिं बहुबिधि एक एकन्ह तर्जहीं॥


वन, बाग, उपवन (बगीचे), फुलवाड़ी, तालाब, कुएँ और बावलियाँ सुशोभित हैं। मनुष्य, नाग, देवताओं और गंधर्वों की कन्याएँ अपने सौंदर्य से मुनियों के भी मन को मोहे लेती हैं। कहीं पर्वत के समान विशाल शरीरवाले बड़े ही बलवान मल्ल (पहलवान) गरज रहे हैं। वे अनेकों अखाड़ों में बहुत प्रकार से भिड़ते और एक-दूसरे को ललकारते हैं।

ऐसे वर्णातीत लंका में हनुमान जी की मित्रता विभीषण से होती है , वे हनुमान जी को माता सीता का पता बताते हैं। अशोक वाटिका में पहुँच कर वे देखते हैं की कपटी रावण सीता माता को अपनी पटरानी बनाने का प्रलोभन दते हुए साम -दंड-भेद नीति से उन्हें आतंकित कर रहा है.

स्याम सरोज दाम सम सुंदर। प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर॥
सो भुज कंठ कि तव असि घोरा। सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा॥

(सीता ने कहा -) हे दशग्रीव! प्रभु की भुजा जो श्याम कमल की माला के समान सुंदर और हाथी की सूँड़ के समान (पुष्ट तथा विशाल) है, या तो वह भुजा ही मेरे कंठ में पड़ेगी या तेरी भयानक तलवार ही। रे शठ! सुन, यही मेरा सच्चा प्रण है।

सीता व्याकुल होकर प्रभु श्रीराम को याद करती है , उसी समय हनुमान जी राम नाम अंकित मनोहर अंगूठी माता के सन्मुख डाल देते हैं।

तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥
चकित चितव मुदरी पहिचानी। हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥


तब उन्होंने राम-नाम से अंकित अत्यंत सुंदर एवं मनोहर अँगूठी देखी। अँगूठी को पहचानकर सीता आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगीं और हर्ष तथा विषाद से हृदय में अकुला उठीं।

सीता माता को संदेह होता है की कहीं यह माया का खेल तो नहीं है ? तब हनुमान जी अपना विशालकाय शरीर प्रगट करते हैं और माता को अपने राम भक्त होने का भरोसा दिलाते हैं।

सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा। लागि देखि सुंदर फल रूखा॥
सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी। परम सुभट रजनीचर भारी॥

हे माता! सुनो, सुंदर फलवाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग आई है। (सीता ने कहा -) हे बेटा! सुनो, बड़े भारी योद्धा राक्षस इस वन की रखवाली करते हैं।

हनुमान जी अशोक वाटिका के वृक्षों को उजाड़ देते हैं, और राक्षसों और रक्वालों को मसल देते हैं , तब मेघदूत उन्हें ब्रह्मपाश में बांध कर रावण के समीप ले जाते हैं रावण व हनुमान जी का प्रसंग बहुत ही मनोहारी है। जिसके लवलेश मात्र से ही महान बने हो , जिनके बल से ब्रह्मा, विष्णु, महेश सृष्टि का सृजन पालन और संहार करते हैं , में उन्हें राम जी का दूत हुँ. ऐसा परिचय केवल रामभक्त हनुमान जी ही दे सकते है.

ढोल नगाड़ों के बीच हनुमान जी ने सारी लंका जला दी केवल रामभक्त विभीषण का घर सुरक्षित रहा। छोटा रूप धर कर हनुमान जी जानकी जी के सन्मुख हाथ जोड़ कर खड़े हुए और और उनसे चूड़ामणि लेकर श्रीराम के पास पुनः वापस आते हैं।

सारा वृतांत सुन कर राम के नयन भर जाते हैं ,प्रभु उनको बार-बार उठाना चाहते हैं, परंतु प्रेम में डूबे हुए हनुमान को चरणों से उठना सुहाता नहीं। प्रभु का करकमल हनुमान के सिर पर है। उस स्थिति का स्मरण करके शिव प्रेममग्न हो गए।

सावधान मन करि पुनि संकर। लागे कहन कथा अति सुंदर॥
कपि उठाई प्रभु हृदयँ लगावा। कर गहि परम निकट बैठावा॥

फिर मन को सावधान करके शंकर अत्यंत सुंदर कथा कहने लगे - हनुमान को उठाकर प्रभु ने हृदय से लगाया और हाथ पकड़कर अत्यंत निकट बैठा लिया।

राम जी का आदेश मिलते ही वानर , भालू और रीछ की सेना विजय घोष करते हुए समुन्द्र तट पर आ उतरी। लंका में केवल एक दूत [अंगद] के आगमन से ही आतंक छा गाय. मंदोदरी का रावण से वार्तालाप कारन अत्यंत मर्मस्पर्शी है।

मुनि पुलत्स्य जी, मंत्री मलयवान , छोटे भाई विभीषण के अनुनय-विनय करने पर रावण क्रोधित होकर उन्हें राज्य से बाहर निकाल देता है।

विभीषण का श्रीराम से मिलाना होता है। जो सम्पत्ति रावण अपन दस शीश देने के बाद रावण को लंका स्वरुप मिली थी उसे करुणानिधान श्रीराम सहज ही विभीषण को दे देते हैं।

राम सेना का समुन्द्र पार करने का प्रसंग भी अत्यंत रोचक है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी जब समुन्द्र के ऊपर वंदन करें का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तब श्रीराम जी धनुष वाण उठा लेते हैं

लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥


हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),

ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)।

तब समुन्द्र हाथ जोड़ कर प्रगट होते हैं और मर्यादा में रहते हैं ,नलनील ऋषि द्वारा प्रदत वरदान के कारण भारी भारी पत्थरों को रामनाम लिख कर समुन्द्र में तैरा कर पूल बांधते हैं। समस्त सेना प्रभु राम को अपने ह्रदय में धारण कर युद्ध की तैयारी करते हैं।

भगवान ने स्वयं कहा है की वे साधु -संतों , भक्तों का कल्याण करने व उन्हें संसार से तारने के लिए समय समय पर प्रगट होते हैं। पूर्ण शरणागत हनुमान नाम का आश्रय लेकर इतना जटिल और असंभव कार्य कर पाते हैं।

यह संसार रूपी रोग की औषधि है। श्री रघुनाथ जी गुणगान सम्पूर्ण संपूण सुन्दर मंगलों को देने वाला है। जो सुन्दर कण को आदर सहित पढेंगें, सुनेगें या मनन करेगें वे सहज ही अन्य साधनों के प्रयोग किये बिना ही भवसागर तर जायेंगें।

हनुमान जी सेतु का कार्य करते है , भक्तों व भगवान के मध्य यही सुन्दरकाण्ड का स्वतः सिद्ध सत्य है.

Media Expo New Delhi opens


Media Expo New Delhi opened its gates today with more than 175 exhibitors. The expo has begun with a great start, having conducted the inauguration ceremony with some of the most prestigious personnel's of the industry.
Mr. Sumit, Director, ITMS
Mr. Dareen Penny, Head of Sales, Roland DG(UK) Ltd, Apsom Infotex
Mr. Tomohiro Ikeda, Managing director, Mimaki India Pvt. Ltd.
Mr. Deborshi Paul Choudhury, Country Head, Colorjet
Mr. Raj Manek, Executive Director and Board Member of Messe Frankfurt Asia Holding Ltd.

Date & Time : 
29th September 2016 -- 10:00 am - 6:00 pm
1st October 2016  -- 10:00 am - 5:00 pm

Venue Hall No. 11-12A, Pragati Maidan, Mathura Road, New Delhi 110002

Free Entry for Business & Trade Visitors only. General public & children will not be allowed entry into exhibition halls. Organisers reserve the right to admission.

For visiting & more information, please contact:

Call +91 95992 03760 Or give a missed call on +91 22 6193 4614

लता जी के जन्मदिन पर म्युजिक एलबम लांच हुआ‘सपने हुए साकार’

-प्रेमबाबू शर्मा

ए.के.एस म्यूजिक लेबल के अंतर्गत ‘सपने हुए साकार’ संगीत एल्बम का लॉन्च किया। इस मौके पर राजू श्रीवास्तव ,सुनील पाल ,सलमा आगा ,साशा आगा ,पुनीत इस्सर ,मनप्रीत आर्या सहित अन्य हस्तियां मौजूद रही। श्रीमती अमृता फडणवीस ने इस एल्बम का अनावरण किया। इस बारे में बात करते हुए ए.के.एस एंटरटेनमेंट के राम शंकर व अश्वनी कुमार सहदेव ने कहा की हम बहुत ही खुश है ‘सपने हुए साकार’ एलबम को लता जी के जन्मदिन के अवसर पर ये गाना हम प्रसारित कर रहे है। ए.के.एस म्यूजिक का एक ही उद्देश्य है की दर्शकों को बेहतरीन संगीत प्रदान कर सके। 

‘सपने हुए साकार’ एलबम को निर्मित किया है अश्विनी कुमार सहदेव, राम शंकर और सुरेश कपाड़ियाय गायक श्रीमती अमृता फडणवीस, बाबुल सुप्रियो , मनोज तिवारी , मीका सिंह , सलमा आगा , अश्विनी कुमार सहदेव, राम शंकर, साधना सरगम , स्नेह शंकर य संगीत दिया है राम शंकर गीत लिखे हैं राजेंद्र सिंह अमर और माया शर्मा ने।

पंजाबी ग्लोबल फाउंडेशन अवार्ड से अभिनेता ‘बब्बू मान’ को सम्मानित किया गया


-प्रेमबाबू शर्मा

मुमंई में समाजिक संस्था पंजाबी ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गुरप्रीत कौर चड्ढा अभिनेता ‘बब्बू मान’ को सम्मानित किया। गुरिंदर सीगल, काव्या राजपूत, वर्षा हरिनखेड़े,अनन्या चड्ढा,राज सूरी, बसंन्त रसिवासिया, गणान्य चड्ढा जैसी अनेक हस्तियांे ने शो में भाग लिया।

बब्बू मान का नाम और उनकी लोकप्रियता से सभी परिचित है,लोकगीत,भंगडा,पाॅप गीत और गजल के माध्यम से उनको एक अलग पहचान मिली। इसके अलावा वे एक सफल अभिनेता,निर्माता,गीतकार और संगीतकार भी हंै। हिन्दी फिल्म हवाएं,रव ने बनाई जोडीयां,देशी रोमांश,इकाम में उनके काम की सराहना हुई। बब्बू मान ने पुरस्कार लेने के बाद खासे उत्साहित नजर आएं। उनका कहना था कि संस्था ने मुझे जो सम्मान दिया,ये मेरे लिए गर्व की बात है।

Be careful in sending messages...


Dr.M.C.Jain

We all know that scientific development in the country has changed the way or our living altogether. This, we often see and feel when we compare our way of living specially in flashing out/or sending our message via electronic media which includes internet, face book , whatsapp , text messages or mails etc. etc. This is a good development in the modern age but it becomes painful and punishable when messages are sent using a very filthy, harmful, indecent or obscene language to someone publicly or in a group so formed. The motive behind of sending such type of messages is to take revenge, or to insult or to disgrace the others in the eyes of family, or members or community or Samaj and so on. Sometimes it is felt that the sender of the messages crosses all the boundaries and limits of moral values, manners, rectitude and probity which, we all know, are against the norms, decency and ethics of morality and also law.

Now a days we all are sending messages via either mails, or face book or whatsapp etc etc to our friends, to the individuals/or in the group so formed for the purpose. We also know that group (s) is being formed/created by a single person and he or she becomes its Admin and later on he or she authorizes others to be its Admin also. But in all cases the creator of the group is considered as main Admin and is responsible for all cause and affects if happens otherwise.

Sending messages to any one via any mode using filthy and indecent language may invite trouble to the sender and the Admin too. Such of his or her act is dealt as per the Cyber Crime Law under various Acts of law including Section 67 of the Information Technology Act, 2000. He or she may be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to five years and with fine which may extend to one lakh rupees and in the event of a second or subsequent conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years and also with fine which may extend to two lakh rupees.

It is my earnest appeal to our friends, members and known in person and all in large to please remain careful while sending their messages to anyone including in the group. It is also appeal to the Admin (s) to see that in her or his group no one plays any such act which may invite him or her in trouble.

राघव ललन तेरे कोमल चरण...




राघव ललन तेरे कोमल चरण...   
 भजन - श्रीमती विद्दुत झा

Click for video @ You Tube:
http://youtu.be/mZNeHg0kL9g 

Wednesday, September 28, 2016

लेखक निर्देशक अरशद सिद्दीकी अब निर्माता बने

-प्रेमबाबू शर्मा

अरशद सिद्दीकी जिन्होंने लेखक के रूप में ‘मार्केट’ और ‘लाल सलाम’ जैसी फिल्में दी हैं, साथ ही अभिनेत्री युक्ता मुखी के साथ फिल्म ‘मेमसाहेब’ का निर्देशन भी किया है, अब स्वयं को निर्माता, निर्देशक के रूप में फिल्म एक तेरा साथ के साथ आ रहे हैं, यह फिल्म उन्होंने अपने गुरु स्वर्गीय श्री के के सिंह के याद में बनायीं है। इस फिल्म का निर्माण अरशद ने अपने बैनर ‘आईफा स्टूडियो’ के साथ ‘बाबा मोशन पिक्चर्स’ के संग निर्माण किया है। अपने अनुभव के आधार पर अरशद ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी की शुरुआत सुरक्षित रूप से शुरू करने के लिए एक ऐसे विषय को चुना जो सुपर नेचुरल पर आधारित है, ऐसी फिल्मो को सिर्फ बेहतरीन पटकथा, दृश्यांकन एवं निर्देशन की जरूरत होती है, न की फिल्मी सितारों की, इसलिए उन्होंने इस फिल्म में टी वी के लोकप्रिय अदाकार शरद मल्होत्रा के साथ हृतु दुदानी एवं मेलानी नाजरेथ को कास्ट किया।

फिल्म एक तेरा साथ“ की कहानी एक ऐसे पारलौकिक गतिविधियों पर आधारित है जो हमारे आसपास वातावरण में होती रहती है, पर जिसे हम कभी समझ पाते हैं, कभी नहीं, इसकी शूटिंग ओरिजिनल एवं रोमांचक लोकेशन पर की गयी है जैसे घाणेराव, जैसलमेर, जोधपुर, दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला एवं मुम्बई में। लोकप्रिय गायक रहत फतेह अली खान इस फिल्म के दो गीतों को अपनी आवाज से सजाया है, यह फिल्म 21 अक्टुबर प्रदर्शित हो रही है, साथ ही एक हॉरर एवं रहस्यात्मक फिल्म होने के अलावा यह पारिवारिक फिल्म भी है।
फिल्म में मुख्य कलाकारों में कलाकार शरद मल्होत्रा, हृतु दुदानी, मेलानी नाजरेथ, दीपराज राणा, विश्वजीत प्रधान, पंकज बैरी, गार्गी पटेल, पदम् सिंह, अनुभव धीर, अपराजिता महाजन एवं कृष्णा राज है। 
 
निर्माता आईफा स्टूडियो , प्रदीप के शर्मा एवं वी नाजरेथ, सह निर्माता अनुभव धीर एवं फरजाना सिद्दीकी, एसोसिएट निर्माता नितेश जांगिड़, लियाकत नासिर, लेखक निर्देशक अरशद सिद्दीकी, संगीत सुनील सिंह, लियाकत अजमेरी, अली ‘पीकू’ एवं नवाब खान, गीत ए एम तुराज, डा देवेंद्र काफिर, असलम सिद्दीकी और हुस्ना खान, गायक उस्ताद राहत फतेह अली खान, सोनू निगम, के के, शाहिद मालया, अमन त्रिखा, भूमि त्रिवेदी और स्वाति शर्मा हैं।

3rd SAMMAAN 2016 award on Women Empowerment


Sachdeva Global School Dwarka organised special assembly on ‘Green Schools Programme’


The Science and Environment Club of Sachdeva Global School Dwarka organised the special assembly on ‘Green Schools Programme’ on Thursday 4th August’2016 with an aim to sensitize students to the environment and empower them to use natural resources in a responsible and an efficient manner.

The speech on the “need to adopt Green Schools Programme and the benefits of auditing”, Alarming Environment facts and a beautiful poem recited by the Globalites were very informative and depicted the importance of “learning to live sustainably”. The skit based on Environmental concepts and solutions was appreciated and was successful in spreading the message of CSE green schools programme to work towards change.

Audit teams were announced and the head of the school Ms.Sumana Dutta Sarkar gave the badges to the student of respective teams. The assembly concluded with the song “Heal the world”.

Happy Birthday- Malay Chakraborty


जीवन की सार्थकता

मधुरिता  

प्राण शक्ति को धारण करने वाला ही जीव कहलाता है. जिस समय तक यह प्राण शक्ति जीव के अन्दर रहती है, वह ही जीवन है. जीवन का हर पल जीव के लिए अमूल्य है. जब पाप और पुण्य समता को प्राप्त हो जाते हैं, तभी मनुष्य का जनम मिलता है. प्रराभाद्ब कर्मो के तदनरूप ही जीव का जनम निश्चित किया जाता है. अमीर, गरीब,  जाति प्रजाति सुख दुःख लाभ हानि शारीरिक बनावट सभी का आकलन करते हुए उसे उसी घर में जनम मिलता है. 

जीवन की चार अवस्थाएं हैं.

बाल्यावस्था
यह जीवन की सबसे आनंद दायक अवस्था होती है. बच्चा जनम लेता है तो खुशियों भरा माहौल होता है, इससे एक पीढ़ी की उन्नति जो होती है. कोई माँ बाप बनता है तो कोई दादा दादी, कोई नाना नानी तो कोई भाई बहन, कितने ही रिश्तों का जनम होता है. शिशु अपने हाव भाव से सभी का दिल जीत लेता है. थोड़ा और बड़ा होता है तो चलना सीखता  है, कई तरह की लीला करते हुए आनंद से दिन बिताता  है. उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती. अपने माता पिता का पूरा सहयोग मिलता है. इसी तरह बचपन सही खेल में बीत जाता है.



युवावस्था
फिर धीरे से युवावस्था आ जाती है, उसे आभास भी नहीं होता. अड़ोसी पड़ोसी ही उसे बताते हैं की वो  अब जवान हो गया है. उसका कद बढ़ जाता है और शारीरिक बनावट भी बदल जाती है. विचारों का बदलाव तो अभी तक में माँ बाप के आधीन लेकिन अब में बड़ा जवान युवावस्था को प्राप्त कर गया तो मैं अब अपने किसी भी क्षेत्र  मैं अपने निर्णय खुद ले सकता हूँ. ऐसा विचार आते ही वे उद्विग्न हो कर अपना आपा खो बैठते हैं और शारीरिक मानसिक बौधिक सभी में  वे अपने को पूर्ण मान बैठते हैं.

कोई तो अपने दोस्तों की कुसंगति होकर बैठते है जो उन्हें पूरा जीवन भोगना पड़ता है. कोई अच्छी संगत करके पढाई में मन लगाना पसंद करते हैं और कोई जीवन में कुछ बन कर ही दम लेते हैं. इंजिनियर डाक्टर आई पी एस वैज्ञानिक और भी ऊँचे ऊँचे सपने साकार करते हैं जिससे माता पिता ही नहीं अपितु देश का नाम भी रोशन करते हैं . युवावस्था ही सबसे नाजुक व् कर्मठ क्रियाशील अवस्था है, इसी आधार पर आगे का जीवन आधारित होता है.



गृहस्थ अवस्था
अब बारी आती है गृहस्थ अवस्था की जो जीवन की सबसे गंभीर अवस्था होती है. क्योकी इसमें अपने जीवन साथी के साथ रहने, साथ चलने, साथ निभाने की जो बात आती है. अब तक के जीवन का सारा आनंद धूमिल होता नज़र आता है. क्यों न हो अगर साथी ही बिगड़ जाए तो कौन बचाए
हाय राम ---------------------------------------------
एक संस्कार से दुसरे संस्कार का मिलना, ये भी एक विज्ञानं ही है. इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं देता जिसका परिणाम अभी के समाज  में दाम्पत्य  जीवन का  बिखरना बखूबी देखा जा रहा है.

जैसे एक बरतन में दो विरोधी रसायन डालने पर उसका परिणाम विस्फोट ही होगा. इसी तरह जब दो विरोधी विचारों संस्कारों को आपस में मिलना पड़े तो उसका सम्बन्ध विच्छेद ही होगा. यह नियम है जब हम इसमें विवेक बुद्धि सद्भावना का मिश्रण मिला  देंगे तो ही हम जीवन साथी का साथ अंत तक पा सकते हैं.
आप दोस्ती कैसे निभाते हैं ? उसे अपनेपन का अहसास कराते हैं. यदि दोस्त कोई गलती भी करता है तो उसे प्यार से समझाते हैं, उसे माफ़ भी करते हैं और पूरी कोशिश करते हैं न तो फिर अपने साथी को अपना बनाने में कंजूसी क्यों ?
ध्यान से शांति से कभी अपने जीवन का विश्लेषण कर के देखें तो गलती हमारे विचारों की ही है. सास बहु को अपना नहीं बना पति, पति पत्नी को अपना नहीं बना पाते, नन्दे भाभी को नहीं मानती. धीरे धीरे सारे सम्बन्धे बिखरते चले जाते हैं और अंत में अपने बच्चे भी हमें छोड़ देते हैं.



वृधावस्था 
इसका परिणाम अगली अवस्था वृधावस्था पर पड़ता है. जिसमे वह बहुत भयावह बन जाता है तो वह  शारीरिक मानसिक बोव्धिक दृष्टी से इतना असहाय हो जाता है की कोई वृधा आश्रम का सहारा लेता फिरता है तो कोई बहु बेटों के ताने खा कर भी मुर्दा समान जिन्दा नज़र आता है. उनकी आँखों में अजीब सा पश्चाताप नज़र आता है नरक समान दुःख पाता है.

इसका जिम्मेदार वह खुद है. इसका अहसास उसे अंतिम छ्नों में होता है. तब तक तो जीवन ही हाथ से निकल जाता है. ओह कितना अफ़सोस होता है की इश्वर ने कृपा कर मानव जन्म दिया था कुछ अच्छा करका आगे का जन्म सुधारने को लेकिन यह क्या ......

हम  स्वर्ग जैसा जीवन भी बना सकते है. इसके लिए हमें कुछ ख़ास नहीं करना केवल नैतिक मूल्यों पर चलना है.  अरे भाई सीधी सी बात है जो कर्म तुम अपने लिए नहीं चाहते वो दूसरों के लिए क्यों करते हो.  जैसे तुम कभी दुखी होना नहीं चाहते , सोचते हो सभी हमें अच्छा व्यवहार करे और इज्ज़त दे , सम्मान करे , आदर करें  तो तुम्हे भी तो दूसरों के साथ ऐसा ही व्यवहार करना पड़ेगा यही तो कहावत है - टिट फॉर टेट - जैसा किया वैसा मिला. मेरा पेन आगे नहीं चल रहा क्योंकि इसके आगे की अंतिम अवस्था मैंने नहीं देखी.

Tuesday, September 27, 2016

Official Emblem launched for FIFA U-17 World Cup India 2017


The Local Organising Committee of the FIFA U-17 World Cup India 2017 (LOC) unveiled the official emblem for what will be the country’s first international football event. The ceremony at Goa’s Marriott Hotel was attended by Gianni Infantino, President of FIFA, and Praful Patel, Chairman of the LOC and of the All India Football Federation (AIFF).

“It is clear for all to see how football has already been making huge strides in India”, said FIFA President Gianni Infantino. “But there is still an enormous room for growth, and the FIFA U-17 World Cup can be an ideal catalyst to develop the sport even further and across the whole country. This is an exceptional opportunity to converge two of FIFA’s core missions: to organise tournaments and to promote football development.”

Fittingly launched during the AFC U16 Championships, which are the first set of qualifiers for next year’s tournament, the emblem of the first ever FIFA Tournament in India was designed as a celebration of the country’s rich and diverse culture, with its main elements being the Indian Ocean, the banyan tree, the kite and the starburst, which is an interpretation of the Ashoka Chakra, an integral part of the national identity.

Each of the aforementioned has been selected for its deep significance in the culture of the country. The Indian Ocean that serves as a base of the Emblem is an integral part of the Subcontinent. The banyan tree is the national tree of India, deeply rooted in the culture and ethos of the country and under which rural communities traditionally gather to take all major decisions in its shade. The kite is the symbol of freedom and fun. Popular across the country, it represents the soaring aspirations of India´s young and vibrant democracy. Finally, the starburst that sits on the top of the Emblem brings the feeling of festivity and celebration, representing all the festivals that grace this multicultural country and making a statement that the FIFA U-17 World Cup will be the new festival in all the calendars.

Shaped like the World Cup trophy, the FIFA U-17 World Cup 2017 emblem combines the global look of the beautiful game with a quintessentially Indian feel. It represents what the tournament stands for.

Talking about the launch, Patel said, “This is a historic occasion for India and the AIFF. Hosting our first FIFA World Cup will change forever the way football is seen in our country.”

Tournament Director of the LOC, Javier Ceppi added, “This is a very important landmark for our Event, as now we have a very distinct image. With the Emblem Launch we will go out to the masses and make sure that the FIFA U-17 World Cup India 2017 is seen across the nation as another festival in our calendar of celebrations, the festival of football. We really have to make this fantastic opportunity count.”

The FIFA U-17 World Cup India 2017 will happen in six venues across the country during the month of October 2017.

UDYAN MELA on Saturday , October 1, 2016



All India Kitchen Garden Association , UDYAN MELA , a day long FRUIT, VEGETABLE AND FLOWER festival with stalls selling seeds, seedlings, plants, garden tools, Organic Items, mouth watering food & pickles and Live demo on gardening, plant potting, Bottle garden,Tray Garden, water garden Rock Garden & vegetable carving on Saturday, October 1, 2016 Between 10 A.M. to 6.00 P.M. at the Gulmohar Club, Gulmohar Park , New Delhi 11049

UDYAN MELA
On Saturday , October 1, 2016
From 10:00 am - 6:00 pm
At GULMOHAR CLUB , GULMOHAR PARK, NEW DELHI 110049

ENTRY FREE

Available under one roof -

• Garden items, Containers and Garden Tools and Accessories
• Vegetables, Fruit, Flower seeds, seedlings, plants, Organic Manures
• Mouth Watering Dishes, Pickles and Papads

*SPECIAL ATTRACTION*
Navratra Food, Demonstrations in Plant Potting, Bottle Garden, and Tray Garden and festival items .

Contact Bella Gupta 9810021628

MBA students of United Institute of Management visited Mother Dairy Manufacturing Plant


MBA students of United Institute of Management , Greater Noida today went for industrial visit at Mother Dairy Manufacturing Plant in Patparganj , New Delhi which is a wholly owned subsidiary of National Dairy Development Board (NDDB) of India today.

Mother dairy plant set up in about 39 acres in East Delhi manufactures and supplies milk, curd, buttermilk, ghee, butter, lassi, milk powder, paneer, ice cream to the National capital Region including Delhi, Greater Noida, ,Gurgaon and adjoining cities.

The Factory Operations Manager gave a presentation related to the history of Mother Dairy Plant. He told students about the white revolution and primitive and newer modes of milk collection and distribution. He also told about the actual milk processing capacity of the plant with the significance of the steps in processing.

Further, a small documentary film of Mother Dairy Plant was shown, which depicted the process of milk production. Students also interacted with the staff of the Mother Dairy Plant and were shown videos and presentation of the drink. The process in the making is totally automated and is internationally designed keeping in mind the hygiene standards. Students enjoyed their bus ride and asked numerous questions.

“The students were informed about several steps from the incoming of raw milk from the rural villagers, around 23 testing methods used to identify milk adulteration, then purifying it, adding fat, minerals, vitamins, SNF, etc. to the newly manufactured milk were shown in detail. The plant is based in a land of approx. 39 acres. This plant purely observes the manufacturing of milk and ice cream. It was an informative, interesting and successful visit that was cherished by the students.”said Ms Mona Gulati Puri, Chief Operating Officer of the United Group of Institutions .

“Industrial Visit to various manufacturing units has numerous benefits as students gain first hand information regarding functioning of the Industry” said Ms Puri ,

Film EK TERA SAATH


Producers : Eyefaa Studio,Pradeep k Sharma & V.Nazareth ‘sFilm EK TERA SAATH story is about paranormal activities happening around us in our daily life which sometimes gets noticed and at times not.

Haunting stories are a myth or truth.. Listening to ghost stories right from childhood makes us believe in their existence. Whoever has experienced it, says its true and the ones who have not experienced any supernatural activity believe it is just a myth.This story is about paranormal activities happening around us in our daily life which sometimes gets noticed and at times not.

Today when all the palaces of Rajputana are modified into lavish heritage sites hotels ,Prince aditya pratap singh(SSHARAD MALHOTRA) chose to do other wise by not transforming Darbar Palace into a hotel. Aditya still feels like a ruler prince who interacts with his forefather’s soul in the palace. He falls in love with a gorgeous lady ‘kasturi’ in Simla and marries her making her ‘PRINCESS KASTURI’ .Life is not always a bed of roses. Princess Kasturi (HRITU DUDANI)dies in a fatal accident. But her soul still recides …inside the palace. The palace is now known as a HORROR PALACE due to the various paranormal activities associated with it. An old college friend of Aditya,sonali (MELANIE NAZARETH)learns about his wife’s unfortunate and tragic death and tries to console him . Gradually, their friendship turns into a much stronger relationship which the possessive spirit doesn’t permit. Sonali becomes the victim of various paranormal activities happening in the palace. She decides to stay by Aditya’s side forever. On the other hand, Suryakant Singh(DEEPRAJ RANA) a dashing police officer coincidently visits the palace. He is shocked to see the haunting activities in the palace and escapes, but haunting mysteries persuades the officer to return back. In the midst of these spine-chilling events ,as the story unveils and the truth unleashes ,who is the chosen one is unimaginable to anyone living or dead.

Main star cast Ssharad malhotra,Hritu dudani,Melanie Nazareth ,Deepraj rana,Vishwajit pradhan,Pankaj berry,Gargi patel,Padam singh,anubhav dheer,aprajita mahajan,Krishna raaz,Co producers : Anubhav Dhir,Farzana Siddiqui, Associate producers : Nitesh Jangid,Liyaqat Nasir Writer & Director : Arshad Siddiqui ,Music : Sunil Singh, Liyakat Ajmeri, Ali ‘Piku’,Nawab Khan ,Lyrics : A M Turaz , Dr.Devendra Kafir, Aslam Siddiqui,Husna Khan ,Singers : Ustad Rahat Fateh Ali khan, Sonu Nigam,kk ,shahid mallya,aman trikha,bhomi trivedi & swati sharma , lyrics : a m turaz ,singers : ustad rahat fateh ali khan & swati Sharma, Music : Liyakat Ajmeri Line Producer : Alam Khan

प्रभु के शरण



प्रभु हम आए शरण तुम्हारी ...... दे दो ज्ञान अब तो हे परमेश्वर .....
भव् भंजन भवतारण भवदुखहारी ..... प्रभु हम आए शरण तुम्हारी .....

नित्य नमन स्वीकारो मनोहर ..... दिव्य अलोकिक भक्ति दे कर .....

 हमको भी सापेक्ष बना दो ना ..... प्रभु हम आए शरण तुम्हारी .....

विनीत भाव से तुमको शीश नवाते ..... परमानंद परब्रहम हे पालनहारी ..... सारे कष्ट मिटा दो स्वामी ..... 
दे कर सहारा अनुपम दिव्य ज्ञान ..... जीवन का हो अभयदान ..... प्रभु हम आए शरण तुम्हारी

कृपा दृष्टी रखना हम पर ..... अलखनिरजन आनंदमयी हे अन्तर्यामी .... बहुत भटके है हरिहर ..... 
बैठ गए अब शरण तुम्हारी ..... प्रभु हम आए शरण तुम्हारी .....


पूर्ण करो यह आशा हमारी .... जय जय हे जगदीश .... 

प्रभु हम आए शरण तुम्हारी .... दे दो ज्ञान अब तो हे परमेश्वर ..... 

स्वरचित भजन - मधुरिता 

अन्ना हजारे की बायोपिक फिल्म का ट्रेलर हुआ रिलीज


-प्रेमबाबू शर्मा

अन्ना हजारे पर बनने वाली बायोपिक ‘अन्ना किसन बाबूराव हजारे’ के मेकर्स ने फिल्म का ट्रेलर जारी कर दिया है। फिल्म में ‘अन्ना की जिंदगी की असल घटनाओं को रेखंकित किया हैं। 
Atul Shrivastava, Shashank Udapurkar, Anna Hazare, Producer Manindra Jain and Govind Namdeo

‘अन्ना को जिंदगी में किन-किन चीजों से प्रेरणा मिली, किन-किन लोगों ने उन्हें प्रभावित किया, ये सारी घटनाएं हमें फिल्म में देखने को मिलेंगी। बाबूराव हजारे जब छोटे थे तो उनकी एक अलग विचारधारा थी और जिंदगी को लेकर उनके बहुत सारे प्रश्न थे। बाबूराव को अपनी जिंदगी का मकसद उनकी जिंदगी में घट रही घटनाओं से समझ आता है।

शुरुआत में बाबूराव हजारे इंडियन आर्मी में ड्राइवर थे। इसके बाद उन्होंने लोगों के हित के लिए काम करना शुरू किया। वो लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने अन्याय भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की ,और अपनी बात मनवाने के लिए अनशन और श्रमदान का सहारा लिया। बाद में कैसे वो अन्ना हजारे के रूप में उभरे और लोकपाल बिल के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में कैसे उन्होंने सरकार से लड़ाई की, ये सारी चीजें फिल्म में बखूबी दर्शाने की कोशिश की गई है.

फिल्म का निर्माण राइज पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशन शशांक उदापुरकर ने किया है। पहली बार निर्देशन कर रहे शशांक मराठी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता हैं। उन्होंने फिल्म में अन्ना हजारे का किरदार निभाने के साथ ही फिल्म के डायलॉग और स्क्रिप्ट भी लिखी है।

Monday, September 26, 2016

Dr. Achala Nagar-famous Film Writer Talking to Dwarka Parichay




Watch full video interview at You Tube: https://youtu.be/Opuup70SOAA

Dr. Achala Nagar-famous Film Writer in an exclusive interview with our Managing Editor S.S. Dogra during 2nd Global Literary Festival Noida @ Marwah Studio, Film City, Noida.

सब टीवी का नया शो इच्छाप्यारी नागिन

-प्रेमबाबू शर्मा

नये प्रयोग करने वाला सब टीवी इस बार एक नये शो ‘इच्छा प्यारी नागिन’ का प्रसारण 27 सितंबर से सोमवार से शुक्रवार, रात 8:00 बजे करने जा रहा है। शो में प्रियाल गौर, मिश्कत वर्मा और फरीदा दादी प्रमुख भूमिकायें अदा कर रहे हैं। 

कल्पनिक कहानी और रोमांचिक कारनामें परिपर्ण शो इच्छाप्यारी नागिन में धरती एवं नागिस्तान की जिंदगी और कहानियों पर आधारित हैं। शो इच्छा नाग एवं नागिनों के बारे में व्याप्त अनेक भ्रम को तोड़ने के उद्देश्य धरती पर आई है। वह बेहद चुलबुली है और इच्छाधारी नागिनों के विपरीत मददगार प्रवृत्ति की है। धरती पर इच्छा प्रताप परिवार के साथ रहती है, जो पेशे से पहलवान हैं। धरती पर रहने के दौरान वह सामाजिक जीवन और लोगों के संघर्ष, संस्कृति, नियमों और समाज के कायदों को समझती है। वह समझती है कैसे कुछ गुण समृद्ध हो रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों के शांतिपूर्वक अस्तित्व के लिये महत्वहीन हैं। अपनी मासूमियत और जिज्ञासु प्रवृत्ति के कारण वह इन मामलों में सवाल करती है। इन सवालों से लोगों को यह महसूस होता है कि जिंदगी कितनी अद्भुत है और हमें उन लोगों के लिये आभारी रहना चाहिये, जो हमारी जिंदगी में हमारी परवाह करते हैं तथा हमसे प्यार करते हैं। इच्छाप्यारी नागिन इच्छा के सफर की एक दिलचस्प लेकिन कारामाती कहानी है। वह खुशियां फैलाती है और लोगों को रिश्तों एवं एक-दूसरे के प्रति प्यार की अहमियत के बारे में अधिक जागरूक बनाती है।

इस शो में प्रियाल गौर इच्छा का किरदार निभा रही हैं और उनके साथ है बबल प्रताप के रूप में मिश्कत वर्मा, जिससे इच्छा को प्यार हो जाता है। इस कहानी में दर्शक हास्य, रोमांस, सस्पेंस और ड्रामा से भरपूर सफर का आनंद उठायेंगे। 

शो के बारे में ने अनूज कपूर, ने बताया कि ‘‘हमने हमेशा नवाचार करने और एक अलग हटकर कंटेट तैयार करने में विश्वास किया है। टेलीविजन पर इन दिनों सुपरनैचुरल कंटेंट की भरमार है और ऐसे में इच्छा एक मित्रवत्, मासूम और पूरी तरह से नुकसानरहित ‘नागिन‘ की कहानी है, जो ताजगीपूर्ण है। इतना ही नहीं, वह समाज के हित में अपनी सुपरनैचुरल शक्तियों का इस्तेमाल करती है। हमें उम्मीद है कि दर्शकों को नाग एवं नागिनों पर हमारा बिल्कुल नया शो पसंद आयेगा।‘‘

2nd Global Literary Festival Noida won the hearts of entire Literary fraternity


 


(S.S. Dogra)

NOIDA. Yes, the three days event, 2nd Global Literary Festival Noida-2016 from 22nd September to 24th September began with an impressive style & won the hearts of entire Literary fraternity. The inauguration ceremony started with traditional Indian custom of lighting the lamp & garlanding the idol of Lord Ganesha. International Chamber of Media & Entertainment Industry & Asian Academy of Arts jointly organized the biggest ever Literary Festival in Noida, U.P. Sh.Sandeep Marwah ji, Jalees Sherwani ji-President-Film Writers Association, Jozef Drofenik-Ambassador of Salovenia, Alfred Vilili-Malawi High Commission, Sh.Pankaj K. Singh ji-Dy.Commissioner RBI, Sh. Buddhinath Mishra ji-Famous Poet & Writer, Sh. Sushil Bharti ji-Director-GLFN, Dr. Ajay Kumar, Sh.Narender Kumar Verma-Chairman Diamond Pocket Books, Dr. Kirti Kale-Well Known Poetess , Dr. Amit Kaur –CSR Head Apeejay Stya University, Mrs. Bushra Muzaffar-Editor of Noida Diary & many prominent literary celebrities & Social Activists graced the inaugural function.

Interaction with celebrities writers, poets, Seminars, Literature, Cinema, Screening of good films, Hasya Kavi Sammelan in Hindi & Sanskrit, Useful Workshops for media students, Book releases, poster launch, Cultural programmes, Fashion shows were the major attraction of the entire 2nd Global Literary Festival. In the three days event, delegates from 30 Countries participated, with around 40,000 Footfalls in 3 Days enjoyed 52 Events with great enthusiasm. This festival has Been acknowledged & declared as One of The Biggest Literary Festival of India-Asian Academy Of Arts & International Chamber of Media And Entertainment Industry. Mr. Sandeep Marwah-Media Guru & The Chairman of the festival has announced a new word “VISUAL LITERATURE” for the new generation.

A postage stamp on renowned international media personality Sandeep Marwah has been planned by Postage and Government Department of Ministry of Communication And Information Technology, Government of India. He is the recipient of more than 100 National Level awards 50 State Level awards and 60 international awards from 30 countries of the World for his 5 World Records and his untiring contribution to the promotion of films, television, media, art and culture. Sandeep Marwah is chairing more than 100 different organizations and forums related to art, culture, film, television, media, fashion, journalism and entertainment which all lead to love, peace and unity through the development and promotion of art and culture.

“I am lucky that department of postage and telegram, Government of India is releasing my stamp. What more I can expect from my Government. My all efforts have been stamped by the good office of Government of Republic of India,” proudly quoted Sandeep Marwah.

 “I want to thank all my well wishers and friends that without your support and direction this three days 2nd Global literary festival Noida wouldn't have been a great success. The journey of three days festival was full of colours, zest, enthusiasm and with full of energy. Seminars on various issues were organised, literary discussions, poetry recitation sessions, The problems of children literature, discussions on literacy language, book releases, master classes, workshops, Kavi Sammelans and technical session were designed in such a way that importance of literature can be re-established again among the literature lovers. All three days, the countries renowned poets, fiction writers and screen writers shared their valuable thoughts and literary vision to the audience. Evening was full of cultural entertainment programmes that added a right flavour to this festival claims Sushil Bharti Festival Director, GLF of said literary festival.

Its yet another feather in the cap of  Marwah Studio that has recently celebrated the Silver Jubilee of its foundation. This Literary Festival has got international recognition under the able leadership of Media Guru Sandeep Marwah. Mr Marwah has been felicitated globally with many prestigious awards for his outstanding contribution to the field of Media particularly Cinema & Television industry. Asian Society of Film & Television (AAFT), in order to promote Delhi NCR in the international circuit of Cinema, also has been organizing the Global Film Festival Noida, Global Festival of Journalism & International Cell phone Cinema Festival every year.

On the concluding day, the book of Dr. Amit Kaur Puri “Women the Achievers” released by Dr. Achala Nagar & Sandeep Marwah. Dr. Achala Nagar-Film Writer felicitated with Global Literary Award & Bal Swaroop Rahi-renowned Poet with Life Time Achievement Award. The memorable kawwali performance of Nizami brothers enjoyed by one all present during the closing ceremony of the 2nd Global Literary Festival Noida.

Safer designed hill roads with tunnels and long bridges on the anvil -NHIDCL


18th International Road Federation (IRF) World Roads Meeting (WRM) 2017 to be held in New Delhi in November 14-17 , 2017 .

New Delhi/Dehradun/Guwahati September 26, 2017 National Highways and Infrastructure Development Corporation Ltd (NHIDCL), a fully owned company of the Ministry of Road Transport & Highways, Government of India will focus on safer and green designed and engineered hill roads having long bridges and tunnels instead of traditional round the hill roads .

“To ensure road safety especially in high rainfall areas in the country including Uttarakhand, Himachal and North East Government plans to incorporate latest technologies and safety features including soil and slope stabilization and roadside safety in hilly terrain infrastructure, crash barriers, intelligent traffic plans, rumble strips, use of speed governors and proper signage’s” said Mr Anand Kumar, Managing Director , National Highways and Infrastructure Development Corporation Ltd (NHIDCL) while speaking on Safe Mobility in Hill Roads – a boon to Economic Development at the curtain raiser meet of International Road Federations (IRF) 18th World Road Meet (WRM) 2017 to be held in New Delhi from November 14-17 , 2017

“At present most of the hill roads in the country have been constructed round the hill slopes which remain cut off during heavy rains due to land slides . Construction of well engineered safe tunnels and long bridges will help in movement of traffic around the year. Apart from construction of tunnels and long bridges government is also working on use of appropriate technologies for soil and slope stabilization for building safer roads in hills. This will include use of locally available materials, growing local flora and fauna on slopes. The other measures will include training of local youth, special separate tough driving license for hill drivers, use of vehicle tracking system and development of safety code for hills” said Mr Kumar.

 “NHIDCL which has been entrusted with task of interconnecting roads in various parts of the country is currently handling about 150 projects of about 9000 km and costing about 9000 crores in 14 states in the country including Uttarakhand, Himachal and North East .

The 18th World Roads Meeting (WRM) is being organised by Geneva based International Road Federation (IRF) a global road safety body working world wide for better roads along with Union Ministry of Road transport and Highways (MoRTH).

“Given the growing demand for road infrastructure, mobility, and the increasing importance of India as a market for road infrastructure and services, India is a befitting venue for the mega event. The theme of the 18th WRM is “Safe Roads and Smart Mobility : The Engines of Economic Growth’’, and will bring together about 4000 representatives of business, industry, governments, public sector organisations, multi-lateral institutions, leaders and transport experts from the automotive, financial, road and transport infrastructure, and construction sectors; professionals, academics, consultants, infrastructure operators, contractors and manufacturers from across the world,” said Mr. K. K. Kapila, Chairman , International Road Federation , the global body working to make roads safer, sustainable, smarter across the world.

“The chosen theme for WRM – 2017 covers Safe Roads, Smart Mobility and Economic Growth; cherished aspirations across the world. As urbanization gathers pace, there is a demand for more road capacity, more traffic, congestion, pollution, traffic accidents and fatalities; all of which negatively affect our quality of life, and place a huge burden on the economy of countries. As the world’s population continues to grow, these challenges will increase in both magnitude and complexity. The WRM – 2017 will explore safe, sustainable, and smart solutions for addressing these and future challenges.” said Mr Kapila.

पतंजलि योग समिति दिल्ली द्वारा सात दिवसीय निशुल्क राष्ट्रीय योग शिविर व योग कार्यशाला आयोजित


पतंजलि योग समिति दिल्ली से संबध योगाचार्य सुरेंद्र डोगरा द्वारा राष्ट्रीय आपदा राहत सेना (NDRF)के जवानों के लिए 13से 19 सितम्बर16 तक आयोजित सात दिवसीय निशुल्क राष्ट्रीय योग शिविर व योग कार्यशाला का विधिवत समापन  8th बटालियन NDRF कैम्पस, कमला नेहरू नगर , ग़ाज़ियाबाद में हुआ।

पतंजलि योगसमिति के योग शिक्षकों को कमाण्डेंट पी के श्रीवास्तव जी ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया व् विधिवत समापन की घोषणा की व् आगे भी योग प्रशिक्षण को लंबी अवधि के लिए पुनः प्रारम्भ करने का अनुरोध किया ।इस शिविर में सम्मानित योग शिक्षकों में श्री सुरेंदर डोगरा जी , बहन डा उदयना, राजवीर जी सुरेन्द्र जी भीषम जी एहेलकर जी ने सम्मान प्राप्त किया ।शिविर में देश को सभी 12 बटालियनों से आये 36 जवानों को योग में अष्टाङ्ग योग का बौद्धिक व् किर्यात्मक प्रशिक्षण  दिया गया।

- सुरेंद्र डोगरा,पतंजलि योगाचार्य , दिल्ली

Dwarka Ramlila 2016 @Sector 10 Dwarka. Video messages/ invitation from prominent persons.


View all videos @link: https://goo.gl/2vEi3v 
Please  share/ forward this invitation with your contacts. Thanks.

Dwarka Ramlila @Sector 10 message from B K Saroj Didi Director, Brahma Kumari Centre, Sector-11, Dwarka




Watch full video message at You Tube: https://youtu.be/_3xq7oIAS2g 

Sunday, September 25, 2016

Dwarka Ramlila @Sector 10 message from Pt.Rajender Shastri-Dada Dev Mandir, Palam



Watch full video message at You Tube: https://youtu.be/okfmnNlGZ_Q

Dwarka Ramlila @Sector 10 message from Sh Saravanan Sastrigal - Purohit Sri Ram Mandir, Dwarka





Watch full video message at You Tube: https://youtu.be/ae1bEwBE_hU

Dwarka Ramlila @Sector 10 message from Pt Kamal Prasad Upadhyay - Sirdi Sai Baba Mandir Dwarka



Watch full video message at You Tube: https://youtu.be/FGmqudehF0s



किरदार काफी चुनौतीपूर्ण हैः सोहा अली खान

-प्रेमबाबू शर्मा

देश में सुनियोजित दंगा,वो भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में भड़के सिख दंगों पर आधारित फिल्म ‘31 अक्टूबर’ 7 अक्टूबर को रिलीज होगी। फिल्म के निर्माता हैरी सचदेव व निर्देशक शिवाजी लोटन पाटिल हैं।

फिल्म में सोहा तजिंदर कौर नाम की हिम्मत वाली पंजाबी महिला के रोल में नजर आएंगी, जबकि वीर दास फिल्म में एक ऐसे सिख का किरदार निभा रहे हैं, जिसका परिवार 1984 के सिख विरोधी दंगों में प्रभावित हुआ था।

फिल्म के बारे में सोहा अली खान ने बताया कि ‘ फिल्म सच्ची घटना,दर्दनाक दंगों और उसमें मरे हजारों इंसान की दस्तां हैं। फिल्म में मैंने अबतक अभिनीत किरदारों की लीक से हट कर भूमिका को जिया हैं। जो मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। मेरा भूमिका एक महिला जिसे हालत के चलते अपने पति और बच्चों में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मैं केवल कल्पना कर सकती हूं कि उस दौर में ऐसा करना किसी भी महिला के लिए कितना कष्टप्रद रहा होगा। सोहा ने फिल्म के बारे में बताया कि ‘31 अक्टूबर’ राजनीतिक स्वार्थ या किसी अन्य एजेंडे को पूरा करने के मकसद से नही बनाई,और ना ही फिल्म इंसाफ के लिए भी नहीं बनाई गई।फिल्म एक सिख परिवार की कहानी सांझा करने के लिए फिल्म बनाई है, जो 1984 की पृष्ठभूमि में निर्मित है। न्याय प्रणाली बेहद जटिल है और हम वकील या न्यायाधीश नहीं हैं। हम कलाकार हैं और हमने एक फिल्म बनाई है इसलिए यह न्याय दिलाने को लेकर नहीं है। यह एक ऐसी फिल्म बनाने को लेकर है, जिसे हम एक थ्रिलर के रूप में देखते हैं। सोहा ने कहा कि लोग फिल्म देखने से पहले ही नाराज हो जाते हैं। लेकिन, विचार रखना जरूरी है, लेकिन आखिरकार हम भी शांति चाहते हैं। मेरा तो कहना है कि फिल्म की कहानी भले ही वास्तविक जीवन पर आधारित है, लेकिन इसे नाटकीय ढंग से फिल्माया गया है, क्योंकि यह भारतीय इतिहास में सबसे बुरे दिनों में से एक बुरे दिन की कहानी है।

खास बात यह है कि फिल्म ‘31 अक्टूबर’ को चार महीने के इंतजार और नौ बड़े कट्स के बाद सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिली है।  फिल्म के निर्माता हैरी सचदेव कहते हैं कि फिल्म में नौ बड़े कट्स किए हैं। सेंसर को लगता था कि कुछ डायलॉग और सींस खास समुदाय को भड़का सकते हैं, इसलिए उन्हें कम करना जरूरी है। ऐसे में सेंसर बोर्ड ने कई बार फिल्म जमा करवाई और जिन सींस से उन्हें ऐतराज था, उन सींस को फिल्म से हटवा दिया। हैरी सचदेव कहते हैं कि हम कलाकार हैं और सबको अभिव्यक्ति का पूरा अधिकार है। एक कलाकार होने के नाते हम अपनी अभिव्यक्ति पर सेंसर नहीं, केवल प्रमाणन सर्टिफिकेट की उम्मीद रखते हैं। जबकि, सेंसर बोर्ड ने कई ऐसे दृश्यों को भी कटवा दिया, जो कहानी के हिसाब से बेहद अहम थे।

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